व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है राहु

मुंबई | हस्तरेखा तज्ञ विनोदजी | भारतीय वैदिक ज्योतष में राहु को मायावी ग्रह के नाम से भी जाना जाता है तथा मुख्य रूप से राहु मायावी विद्याओं तथा मायावी शक्तियों के ही कारक माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त राहु को बिना सोचे समझे मन में आ जाने वाले विचार, बिना सोचे समझे अचानक मुंह से निकल जाने वाली बात, क्षणों में ही भारी लाभ अथवा हानि देने वाले क्षेत्रों जैसे जुआ, लाटरी, घुड़दौड़ पर पैसा लगाना, इंटरनैट तथा इसके माध्यम से होने वाले व्यवसायों तथा ऐसे ही कई अन्य व्यवसायों तथा क्षेत्रों का कारक माना जाता है।

नवग्रहों में यह अकेला ही ऐसा ग्रह है जो सबसे कम समय में किसी व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है तथा इसी लिए इस ग्रह को मायावी ग्रह के नाम से जाना जाता है। अगर आज के युग की बात करें तो इंटरनैट पर कुछ वर्ष पहले साधारण सी दिखने वाली कुछ वैबसाइटें चलाने वाले लोगों को पता भी नहीं था की कुछ ही समय में उन वैबसाइटों के चलते वे करोड़पति अथवा अरबपति बन जाएंगे। किसी लाटरी के माध्यम से अथवा टैलीविज़न पर होने वाले किसी गेम शो के माध्यम से रातों रात कुछ लोगों को धनवान बना देने का काम भी इसी ग्रह का है राहु एक छाया ग्रह हैं तथा मनुष्य के शरीर में राहु वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ज्योतिष की गणनाओं के लिए ज्योतिषियों का एक वर्ग इन्हें पुरुष ग्रह मानता है जबकि ज्योतिषियों का एक अन्य वर्ग इन्हें स्त्री ग्रह मानता है। कुंडली में शुभ राहु का प्रबल प्रभाव कुंडली धारक को विदेशों की सैर करवा सकता है तथा उसे एक या एक से अधिक विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी करवा सकता है। कुंडली में राहु के बलहीन होने से अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव में होने से जातक को अपने जीवन में कई बार अचानक आने वाली हानियों तथा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे जातक बहुत सा धन कमा लेने के बावजूद भी उसे संचित करने में अथवा उस धन से संपत्ति बना लेने में आम तौर पर सक्षम नहीं हो पाते क्योंकि उनका कमाया धन साथ ही साथ खर्च होता रहता है।

राहु पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को मानसिक रोगों, अनिद्रा के रोग, बुरे सपने आने की समस्या, त्वचा के रोगों तथा ऐसे ही अन्य कई बिमारियों से पीड़ित कर सकता है।राहु के बारे में हमे बहुत ध्यान से समझना चाहिये, बुध हमारी बुद्धि का कारक है, जो बुद्धि हमारी सामान्य बातों की समझ से सम्बन्धित है, जैसे एक ताला लगा हो और हमारे पास चाबियों का गुच्छा है, जो बुध की समझ है तो वह कहेगा कि ताले के अनुसार इस आकार की चाबी इसमे लगेगी, दस में से एक या दो चाबियों का प्रयोग करने के बाद वह ताला खुल जायेगा, और यदि हमारी समझ कम है, तो हम बिना बिचारे एक बाद एक बडे आकार की चाबी का प्रयोग भी कर सकते है, जो ताले के सुराख से भी बडी हो, बुध की यह बौद्धिक शक्ति है क्षमता है, वह हमारी अर्जित की हुई जानकारी या समझ पर आधारित है, जैसे कि यह आदमी बडा बुद्धिमान है, क्योंकि अपनी बातचीत में वह अन्य कई पुस्तकों के उदाहरण दे सकता है, तो यह सब बुध पर आधारित है, बुध की प्रखरता पर निर्भर है, और बुध का इष्ट है दुर्गा।

राहु का इष्ट है सरस्वती, सम्भवत: आपको यह अजीब सा लगे कि राहु का इष्ट देवता सरस्वती क्यों है, क्योंकि राहु हमारी उस बुद्धि का कारक है, जो ज्ञान हमारी बुद्धि के बावजूद पैदा होता है, जैसे आविष्कार की बात है, गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त न्यूटन ने पेड से सेब गिरने के आधार पर खोजा, यह सिद्धान्त पहले उसकी याददास्त में नही था, यहां जब दिमाग में एकदम विचार पैदा हुआ, उसका कारण राहु है, बुध नही होगा, जैसे स्वप्न का कारक राहु है, एक दिन अचानक हमारा शरीर अकडने लगा, दिमाग में तनाव घिर गया, चारों तरफ़ अशांति समझ में आने लगी, घबराहट होने लगी, मन में आने लगा कि संसार बेकार है, और इस संसार से अपने को हटा लेना चाहिये, अब हमारे पास इसका कारण बताने को तो है नही, जो कि हम इस बात का विश्लेषण कर लेते, लेकिन यह जो मानसिक विक्षिप्तता है, इसका कारण राहु है, इस प्रकार की बुद्धि का कारक राहु है, राहु के अन्दर दिमाग की खराब आलमतों को लिया गया है, बेकार के दुश्मन पैदा होना, यह मोटे तौर पर राहु के अशुभ होने की निशानी है, राहु हमारे ससुराल का कारक है, ससुराल से बिगाड कर नही चलना, इसे सुधारने के उपाय है, सिर पर चोटी रखना राहु का उपाय है, आपके दिमाग में आ रहा होगा कि चोटी और राहु का क्या सम्बन्ध है, चोटी तो गुरु की कारक है, जो लोग पंडित होते है पूजा पाठ करते है, धर्म कर्म में विश्वास करते है, वही चोटी को धारण करते है, राहु को अपना कोई भाव नही दिया गया है, इस प्रकार का कथन वैदिक ज्योतिष में तो कहा गया है, पाश्चात्य ज्योतिष में भी राहु को नार्थ नोड की उपाधि दी गयी है, लेकिन कुन्डली का बारहवां भाव राहु का घर नही है तो क्या है, इस अनन्त आकाश का दर्शन राहु के ही रूप में तो दिखाई दे रहा है, इस राहु के नीले प्रभाव के अन्दर ही तो सभी ग्रह विद्यमान है, और जितना दूर हम चले जायेंगे, यह नीला रंग तो कभी समाप्त नही होने वाला। राहु ही ब्रह्माण्ड का दृश्य रूप है।

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