April 20, 2026

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आज मेरे देश को बातों के बादशाह नहीं, आचरण के चाहिए आचार्य

हिगनघाट में साहित्य, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम




हिंगणघाट । एड अब्दुल अमानी कुरेशी। साहित्य और काव्य प्रेमियों के लिए हिंगणघाट में एक यादगार एवं प्रेरणादायक शाम का आयोजन किया गया, जब निसर्गसाथी फोरम के तत्वावधान में भव्य कवि सम्मेलन एवं सत्कार समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर वीररस के प्रख्यात कवि डॉ. शांतीलाल मेघराजजी कोचर को काशी हिंदी विद्यापीठ द्वारा प्रदान की गई डॉक्टरेट उपाधि के उपलक्ष्य में उनका विशेष सत्कार किया गया। इस सम्मान समारोह ने पूरे कार्यक्रम को गौरवपूर्ण शुरुआत प्रदान की।

यह भव्य आयोजन दिनांक 19 अप्रैल 2026, रविवार, सायं 7:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक द्वारकामाई, येनोरा रोड, हिंगणघाट में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध चित्रकार एवं शिल्पकार हरिहरजी पेंदे ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार मा. वियनवार सर की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सत्कार समारोह के पश्चात कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ, जिसमें विभिन्न प्रतिष्ठित बहुभाषी कवियों ने अपनी सशक्त, भावपूर्ण और स्वरचित रचनाओं का प्रभावशाली वाचन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में इब्राहीम बक्ष, श्री. भगवान पोटे, प्रा. गजानन शेंडे, प्रा. मजीदबेग मुगल शहजाद, सौ. लीना शेंडे, एड. अब्दुल अमानी कुरेशी, डॉ. बालाजी राजूरकर, राजश्री विरुळकर, योगीराज कोचाले, प्रशांत शेळके, वासुदेव पडवे, सौ. संगीता गडवार, डॉ. गिरीधर काचोळे, नरेंद्र गंधारे, वसंत गिरडे, ज्ञानेश्वर वाघमारे, निलिमा मोहमारे, शारदा भोयर एवं सौ. विजया हरिहर पेंदे सहित अनेक कवियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से वातावरण को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में विचारों की गहराई अध्यक्षीय भाषण देते हुए कलाकार हरिहर पेंदे ने कहा कि,

"कविता समाज का दर्पण होती है और कवि अपने शब्दों के माध्यम से समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और भावनाओं को सजीव रूप देता है। ऐसे आयोजनों से न केवल साहित्य का विकास होता है, बल्कि नई प्रतिभाओं को भी अपनी अभिव्यक्ति का सशक्त मंच प्राप्त होता है।"

उनके विचारों ने उपस्थित श्रोताओं और युवा रचनाकारों को विशेष रूप से प्रेरित किया।

चित्रकला प्रदर्शनी ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा कार्यक्रम के समापन अवसर पर अध्यक्ष हरिहर पेंदे द्वारा निर्मित आकर्षक एवं भावपूर्ण पेंटिंग्स की प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।दर्जनों कलाकृतियों में जीवन, प्रकृति और मानवीय भावनाओं की गहराई को अत्यंत प्रभावी ढंग से उकेरा गया था। हर एक चित्र मानो अपनी अलग कहानी कहता हुआ दर्शकों को भावविभोर कर रहा था। उपस्थित कला प्रेमियों ने इन रचनाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने साहित्यिक वातावरण को समृद्ध बनाने और कवियों की रचनाओं पर उत्साहपूर्वक दाद देने के लिए सभी श्रोताओं एवं उपस्थित गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

इस सफल आयोजन की, प्रस्तावना डॉ. बालाजी राजूरकर एवं संचालन प्रा. नियाजुद्दीन सिद्दीकी सर ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि आभार प्रदर्शन यशवन्त गडवार द्वारा किया गया।




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सोनम कौर भाटिया

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