रीवा। समशेर सिंह गहरवार । प्रतिनिधियों के समस्त अधिकार वापस कर,जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने हेतु अखिल भारतीय स्तर के प्रतियोगी परीक्षा आयोजित किए जाएं।।सरपंच महा परिषद एवं अंतर्राष्ट्रीय अधिवक्ता दिवस के अध्यक्ष ब्रह्मांशी पंडित राजकुमार सिंह तिवारी ने राष्ट्रीय पंचायत दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि पंचायत के समस्त अधिकार पुनः वापस किए जाएं ।यह दिवस पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यों की सराहना करने एवं उन्हें ग्रामीण विकास के लिए प्रेरित करने का भी अवसर है ।
पंचायत राज की अवधारणा प्राचीन भारत से चली आ रही है।जहां पर पंच परमेश्वर कहलाते थे। जो ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय मामलों का प्रबंधन कर समस्यायों का निराकरण करते थे। किंतु अंग्रेजों ने इस संस्था को कमजोर कर दिया। इसके बाद स्वतंत्र भारत में बलवंत राय मेहता समिति द्वारा 1957 में त्रिस्तरीय पंचायती राज संरचना का प्रस्ताव रखा। जिसे सर्व प्रथम राजस्थान ने 1959 में इसे लागू किया। इसका उद्देश्य है बुनियादी स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाना । यह 1993 में 73वें संविधानिक संशोधन के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र ग्राम स्वराज को मान्यता मिलने का प्रतीक है ।यह दिन ग्रामीण सशक्तिकरण हेतु सत्ता के विकेंद्रीकरण और आत्म निर्भर गांव के निर्माण के महत्व को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 24 अप्रैल 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया । तब से यह ढाई लाख से अधिक पंचायत और 49.75 प्रतिशत महिलाओं सहित 20.4 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ स्थापित शासन अधिक समावेशी हो गया है। इसके माध्यम से लोकतंत्र की मजबूती हेतु सत्ता केंद्र से हटकर ग्राम सभा में जाती है। जिससे शासन में जनभागीदारी बढ़ती है। स्थानीय स्वशासन के तहत गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करती है। पंचायत को अपनी योजनाएं स्वयं बनाने और लागू करने का अधिकार सहित गांव के बुनियादी जरूरत स्वच्छता विकास शिक्षा और स्वास्थ्य को स्थानीय स्तर पर हल करने एवं समावेशी प्रतिनिधित्व से सभी वर्गों महिलाओं और वंचित वर्गों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है।आत्मनिर्भर भारत के तहत, जब गांव जागेगा देश आगे बढ़ेगा, की भावना के साथ गांव को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। ग्राम पंचायत के माध्यम से ही युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है।
युवा सशक्तिकरण के तहत युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास कर, नागरिक चेतना को प्रोत्साहित करना, संवैधानिक मूल्य सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक चेतना को बढ़ावा देने, युवाओं के कौशल विकास बौद्धिक क्षमता का विकास कर ग्राम पंचायत के विकास में सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है। साथ ही साथ युवाओं की समझ को मजबूत कर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर मिलता है। किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि एक तरफ जहां पंचायत के सशक्तिकरण को बातें की जाती है वहीं उनके समस्त अधिकार छीनकर पंचायत प्रतिनिधियों को पंगु बना दिया गया है। सत्ता का केंद्रीय करण हो गया है। जिससे समस्त शक्तियां विधानसभा एवं लोकसभा में समाहित हो गई हैं । पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय अवसर पर छोटे से छोटे कामों के लिए भी कर्मचारी एवं नेताओं के चक्कर लगाते रहते हैं। अधिकार विहीन होने से पंचायत प्रतिनिधि कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में प्रदत्त शक्तियों जो 2005 तक कायम थी उनको हटा लिया गया है ।जिन्हें तुरंत वापस किया जाए ताकि पंचायत प्रतिनिधि पंचायत को सशक्त कर विकास को मजबूती प्रदान कर सकें ताकि भारत पुनः सोने की चिड़िया बन सके। जब एक जिले को चलाने के लिए आईएएस परीक्षा पास व्यक्ति को जिलाधीश नियुक्त किया जाता है और वह अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा देता है। तब एक देश एवं प्रदेश को चलाने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद ,विधायक और पंचायत के प्रतिनिधि को तो और बड़ी शैक्षणिक योग्यता चाहिए। साथ ही साथ उनके लिए भी आईएएस की तरह, आई पी आर ई ऑल इंडिया पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव एग्जाम अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की जाए और जो पास हो उन्हीं को चुनाव लड़ने की अनुमति प्रदान की जाए। तभी देश योग्य, शिक्षित एवं पढ़े-लिखे लोगों के हाथ में रहेगा और पुनः विश्व गुरू बनेगा। उक्त अक्षर पर राम रतन सिंह तिवारी, निवास यादव,गुड्डू, तिवारी , गोस्वामी जी आदि जनप्रतिनिध, अधिवक्ता गण एवं गण मान्य नागरिक उपस्थित रहे।