नई दिल्ली | न्यूज़ डेस्क | दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। 20 वर्षीय युवक की कार फिसलकर खुले नाले में जा गिरी, जिससे उसकी जान चली गई। जानकारी के अनुसार, युवक यशवेंद्र अपनी महिला मित्र के साथ नांगल देवत इलाके से घर लौट रहा था। इसी दौरान यशवेंद्र कार से नियंत्रण खो बैठा और वाहन सीधे खुले नाले में जा गिरा। हादसे के बाद कार पलट गई, जिससे युवक की मौत हो गई।
बारिश के चलते हुआ एक दर्दनाक हादसा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कार महिला की है, लेकिन दुर्घटना के समय वाहन यशवेंद्र चला रहा था। दोनों की दोस्ती अमेरिका में उच्च शिक्षा के दौरान हुई थी। पुलिस के मुताबिक, यशवेंद्र भारतीय सेना के एक अधिकारी का बेटा था जबकि उसकी महिला मित्र वसंत कुंज की निवासी है। पुलिस की विस्तृत जांच जारी है। उसके पिता ओखला स्थित एक निजी कंपनी में साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में कार्यरत हैं और उसकी मां गृहिणी हैं। पुलिस का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शी और साथ मौजूद युवती के बयान के आधार पर शुरुआती जांच में सड़क पर फिसलन को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
अधिकारियों ने बरती लापरवाही
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस खुले नाले की वजह से यह हादसा हुआ, वह लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बनता रहा है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद अब तक नाले को सुरक्षित बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कार हादसे में गई एक युवक की जान
सूचना मिलते ही वसंत कुंज साउथ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय कार 20 वर्षीय यशवेंद्र चला रहा था, जबकि उसकी महिला मित्र आगे वाली सीट पर बैठी थी। दोनों पिछली रात अपने एक दोस्त के घर रुके थे और शुक्रवार सुबह वहां से घर लौट रहे थे।दिल्ली पुलिस ने मीडिया को बताया कि हादसे में यशवेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। वहीं, महिला मित्र सुरक्षित है और उसने घटना के संबंध में पुलिस को जानकारी दी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लगाए आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाला दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। उनका आरोप है कि नाले को ढकने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई और बैठकों में भी यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए होते, तो शायद इस तरह की दुखद घटना टाली जा सकती थी।