न्यूज डेस्क । महाराष्ट्र। युगधारा फाउंडेशन, लखनऊ की महाराष्ट्र इकाई के तत्वावधान में स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अकोला के वरिष्ठ रचनाकार डॉ प्रमोद शुक्ल ने की, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में, देहरादून, उत्तराखंड के वरिष्ठ गीतकार डॉ शिव मोहन सिंह थे, कार्यक्रम का सफल संचालन अविनाश बागड़े ने किया । कार्यक्रम का प्रारम्भ डॉ मृदुल तिवारी महक की वन्दना से हुआ । संयोजक रामकृष्ण सहस्रबुद्धे ने अतिथियों का परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया ।
काव्य पाठ में एड. अब्दुल अमानी कुरैशी ने कहा - खुशियों के गीत गाओ कि पंद्रह अगस्त है । इसके बाद वाचस्पति तिवारी ने ग़ज़ल पढ़ी - निज़ाम ख़ुद को अगर खास मान बैठा हो, हो ऐसा कुछ कि निज़ाम ए जहाँ बदल जाए । किरन तिवारी ने अपने काव्य पाठ में कहा- बड़ी भक्ति बड़ी शक्ति बड़ी साहस से आई है, लुटाई जान कितनों ने तभी आजादी पाई है।
मंजूषा किंजवड़ेकर ने कहा भारत माँ का गौरवगान हो, युवा शक्ति देश अभिमान हो । मृदुल तिवारी की रचना देश की मिट्टी महक रही है, वीरों के बलिदान से, कहकर जोश भर दिया । इस अवसर पर शशि भार्गव ने भी शहीदों को याद किया । सहस्रबुद्धे ने कहा अपने गौरवमय अतीत पर अभिमान करना चाहते हैं, राष्ट्र की संस्कृति बचाने संवाद करना चाहते हैं । अविनाश बागड़े ने भारत माँ का इतिहास उज्ज्वल कण कण गीत सुनाता है, रचना पढ़ी |
मुख्य अतिथि ने अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी के साथ ऐसे आयोजन की सराहना की । उनकी पंक्तियाँ थीं - भारत माँ के लाल सभी देश हमारा मान रहे । अध्यक्षता करते हुए डॉ शुक्ल ने स्वाधीनता की लड़ाई में शहीदों को स्मरण किया । अंत में राष्ट्रीय महासचिव सौम्या मिश्रा अनु ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम में डॉ मुकुंद जोशी, डॉ विभा प्रकाश, रूबी दास सहित अनेक रचनाकार उपस्थित रहे ।