रायपुर | मीनल केडेकर | रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित संसद की प्रतिष्ठित प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) की महत्वपूर्ण बैठक में सम्मिलित हुए। बैठक का मुख्य विषय "देश में भारी उपकरण उत्पादन क्षमता की समीक्षा" था। बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय और पूंजीगत वस्तु (कैपिटल गुड्स) क्षेत्र के समग्र विकास, उत्पादन क्षमता विस्तार तथा भविष्य की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के विजन को धरातल पर उतारने में भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु उद्योग की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। देश की जीडीपी में लगभग 1.9 प्रतिशत का प्रत्यक्ष योगदान देने वाला यह क्षेत्र अन्य सभी विनिर्माण उद्योगों (जैसे खनन, बिजली, निर्माण, ऑटोमोबाइल व रक्षा) को आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराकर औद्योगिक क्रांति को गति दे रहा है।
विनिर्माण और निर्यात में देश ने दर्ज की अभूतपूर्व वृद्धि
अग्रवाल ने समिति के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 4 वर्षों में केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारी उपकरण क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
अर्थमूविंग, निर्माण एवं खनन मशीनरी क्षेत्र का उत्पादन वर्ष 2020-21 के ₹29,021 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹80,750 करोड़ (178.3% की भारी वृद्धि) तक पहुँच गया है, जबकि निर्यात में 274.4% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। मशीन टूल्स एवं डाई-मोल्ड क्षेत्र जिसे 'मदर इंडस्ट्री' कहा जाता है, उसका उत्पादन ₹6,602 करोड़ से बढ़कर ₹14,286 करोड़ (116.4% वृद्धि) हो गया है। विद्युत मशीनरी: ट्रांसफॉर्मर, बॉयलर, टर्बाइन जैसे भारी विद्युत उपकरणों के उत्पादन में उल्लेखनीय उछाल आया है तथा आयात पर निर्भरता में 19.6% की कमी दर्ज की गई है।
अग्रवाल ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित 'भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन स्कीम (चरण I एवं II)' के माध्यम से देश के प्रमुख संस्थानों (IITs, IISc, CMTI, ARAI, BHEL) के सहयोग से उत्कृष्ट अनुसंधान केंद्र (CoE), कॉमन इंजीनियरिंग फैसिलिटी सेंटर और उद्योग त्वरक स्थापित किए गए हैं। इसके अंतर्गत 25 से अधिक नई स्वदेशी तकनीकों का विकास कर उनका सफल व्यवसायीकरण किया जा चुका है तथा 70 से अधिक बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दाखिल किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास व स्थानीय युवाओं के कौशल उन्नयन पर जोर
बैठक में सांसद अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ जैसे खनिज, ऊर्जा और उद्योग बहुल राज्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खनन व इस्पात उत्पादक राज्यों में से एक है, अतः राज्य में भारी मशीनरी, खनन उपकरणों के आधुनिक विनिर्माण व मेंटेनेंस हब की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने समिति के समक्ष मांग रखी कि आधुनिक तकनीक व इंडस्ट्री 4.0 की आवश्यकताओं को देखते हुए स्थानीय युवाओं के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी कौशल केंद्र विकसित किए जाएं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन हो सके।
अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद की प्राक्कलन समिति द्वारा तैयार किए जाने वाले नीतिगत सुझाव देश को भारी उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।