मुंबई | न्यूज़ डेस्क | गणेश उत्सव इस बार 10 नहीं 12 दिनों का होगा गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तक चलता है। यह अवधि मुख्य रूप से 10 तिथियों की होती है। गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की स्थापना होती है और अनंत चतुर्दशी को विसर्जन होता है। स्थापना और विसर्जन वाले दोनों दिनों को मिलाकर कुल 12 कैलेंडर दिन बनते हैं।
हालांकि, पंचांग में किसी तिथि की वृद्धि या क्षय के कारण दिनों की संख्या में 1 दिन का अंतर आ सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यह 10-दिवसीय मुख्य उत्सव ही माना जाता है जिसे लोग अपनी श्रद्धा अनुसार 12 दिनों के कैलेंडर विस्तार में मनाएंगे।आराधना का लंबा अवसर: कैलेंडर की तिथियों के अनुसार 14 सितंबर से 25 सितंबर तक भक्तों को बप्पा की सेवा, पूजा-अर्चना और मोदक के भोग का 12 दिनों का अवसर मिल रहा है। भक्तगण इस बार पूरे 12 दिनों तक गणपति बप्पा की सेवा और आराधना कर सकेंगेनौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पंचांग में तिथियों के इस प्रकार मेल खाने से यह उत्सव और भी विशिष्ट व फलदायी माना जा रहा है। पंचांग गणना के अनुसार तिथियों के घट-बढ़ से कई वर्षों बाद इस तरह का पंचांगीय संयोग बनता है।
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, जो भगवान गणेश के पिता हैं। पिता और पुत्र के इस अद्भुत संयोग से इस बार का उत्सव आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। हिन्दू पंचांग और तिथियों की गणना के अनुसार, इस बार तृतीया तिथि से लेकर अनंत चतुर्दशी तक का योग ऐसा बन रहा है कि उत्सव की कुल अवधि बढ़कर 12 दिन हो गई है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि समाप्त:प्रातःकाल हरितालिका पूजा मुहूर्त- सुबह 06:26 से 07:06 तक।गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त: मध्याह्न 11:20 से 01:48 तक।गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है। 14 सितंबर को सुबह 09:12 बजे से रात 08:58 बजे तक चंद्र दर्शन से बचें ।पूजा स्थान पर उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की नई मूर्ति स्थापित करें।गणेश जी की स्थापना के समय दूर्वा , मोदक या बेसन के लड्डू, लाल फूल , अक्षत और शमी के पत्ते अवश्य अर्पित करें।