October 16, 2026

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नशा है बुराई मेरे दोस्तों




रचयिता — डॉ. अशोक कुमार वर्मा


कर्म वो करो, जो धर्म पर टिका हो,

धर्म है वही, जिसमें सबका भला हो।

किसी ने कहा है, मेरे दोस्तों—

नशा मत करो, नशा मत चुनो,

नशा मत रखो।

नशा है बुराई, मेरे दोस्तों।


नशा मत देखो, नशा मत सोचो,

नशा मत छुओ।

नशे की चाह है बुरी, मेरे दोस्तों।

नशे से बचो, नशे से डरो,


नशे की राह पर कदम न धरो।

नशे की कमाई बुरी, मेरे दोस्तों।

नशा छोड़ो, जी खेल से जोड़ो,

पदक लाओ, ऊँचा पद पाओ,

यही है सच्चाई, मेरे दोस्तों।

आओ मिलकर सौगंध उठाओ,

नशामुक्त राष्ट्र बनाओ,

नशा है बुराई, मेरे दोस्तों।





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